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व्याकरण

व्याकरण का परिभाषा

शुद्ध भाषा को बोलने के लिए भाषा के कुछ नियम होते हैं और उन नियमों को व्याकरण कहा जाता है। हिंदी भाषा बोलने के लिए भी हमें कुछ नियम की आवश्यकता पड़ती है। व्याकरण एक प्रकार से भाषा का नियम है,भाषा को बोलने के लिए ध्वनि, शब्द और वाक्य बोलने के लिए हमें नियमों की आवश्यकता पड़ती है।
भाषा की सबसे छोटी इकाई वर्ण कहलाती है और बड़ों को दो भागों में नहीं बांटा जा सकता है।
जब दो वर्ण आपस में मिलते हैं तो उन्हें शब्द कहा जाता है।
शब्दों को मिलाकर एक वाक्य का निर्माण किया जाता है।

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भाषा की परिभाषा दीजिए

विश्व में सभी देश की अपनी-अपनी एक राष्ट्रीय भाषा है।
“भाषा शब्द संस्कृत के भाष शब्द से बना है और भाष शब्द का अर्थ होता है बोलना,भाषा की सार्थक इकाई वाक्य है,वाक्य से छोटी छोटी इकाई उपवाक्य, उपवाक्य से छोटी इकाई पदबन्ध, पदबंध से छोटी इकाई अक्षर और अक्षर से छोटी इकाई ध्वनि या वर्ण हैं”।

राष्ट्रीय भाषा किसे कहते हैं

जब कोई देश राजकीय कार्य के लिए किसी भाषा को घोषित कर देता है तो वह उस देश की राष्ट्रीय भाषा कहलाती है।
उदाहरण के लिए अमेरिका में सारे राजकीय कामकाज अंग्रेजी भाषा में होते है, तो अमेरिका की राष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी है, इसी प्रकार इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय भाषा थी अंग्रेजी है।
भारत में राष्ट्रीय भाषा का दर्जा अभी तक हिंदी को प्राप्त नहीं हुआ है सरकारी कामकाज के लिए भारत में अंग्रेजी भाषा को मान्यता दी है। गांधीजी ने राष्ट्रीय भाषा के लिए पांच लक्षण या शर्त का होना जरूरी बताया था जैसे
वह भाषा सरल होनी चाहिए।
देश के आधे से ज्यादा लोगों को उस भाषा को बोलना चाहिए।
राष्ट्रीय भाषा से देश का धार्मिक आर्थिक और राजनीतिक व्यवहार होना चाहिए।
राष्ट्र के लिए वह भाषण आसान होनी चाहिए।
भाषा का विचार करते समय किसी अल्प स्थाई स्थिति पर जोर नहीं देना चाहिए।

स्वर वर्ण किसे कहते हैं

” जो वर्ण स्वतंत्र रूप से बोले जाते है उन्हें स्वर कहा जाता हैं”।
परंपरागत रूप से स्वर को संख्या 13 मानी गई है और उच्चारण की दृष्टि से इनमें केवल दस ही स्वर है, (आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ)।
स्वरों का वर्गीकरण
हास्य स्वर
– जिनके उच्चारण में कम से कम समय लगता है। उदाहरण (अ, इ, उ)
दीर्घ स्वर – जिनके उच्चारण में हास्य स्वर से भी अधिक समय लगता है उन्हें दीर्घ स्वर कहा जाता है जैसे आ, ई, (ऊ,ए, ऐ,ओ, औ,ऑ)।
लुप्त स्वर – जिनके उच्चारण में दीर्घ स्वर से भी अधिक समय लगता है, किसी को पुकारने या नाटक के संवाद में इसका प्रयोग किया जाता है।
जीभ के प्रयोग के आधार पर
अग्र स्वर – जिन स्वर के उच्चारण में जीभ का (अग्र भाग) काम करता है इ, ई,ए, ऐ।
मध्य स्वर – जिन स्वर के उच्चारण में जीभ का मध्य भाग काम करता है उदाहरण (अ)
पस्च स्वर – जिन स्वर के उच्चारण में जीभ का पस्च भाग काम करता है जैसे (आ, उ, ऊ,ओ, औ, ऑ)।

विशेष वर्ण किसे कहते हैं

आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ तथा औ इत्यादि को विशेष वर्ण कहा जाता है इनकी संख्या लगभग 8 होती है।

व्याकरण की परिभाषा और उसके भेद

भाषा बोलने के लिए और भाषा लिखने के लिए जिन नियमों की आवश्यकता पड़ती है उसे व्याकरण कहा जाता है। हिंदी व्याकरण में वर्ण, स्वर और व्यंजन, क्रिया, विश्लेषण, अव्यव, वर्तनी के बिना हिंदी भाषा ना बोली जा सकती है और ना लिखी जाती है।

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